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Nalin Vilochan sharma : Sampurn Kahaniyan
आचार्य नलिन विलोचन शर्मा बहुआयामी प्रतिमा सम्पन्न रचनाकार हैं। इनका व्यक्तित्व और कृतित्व काफी विस्तृत और विविध है। जीवन के महज साढ़े पैंतालीस वर्ष खर्च करके इन्होंने साहित्य का इतिहास दर्शन, आलोचना, निबंध, कविता, कहानी, संस्मरण और अनुवाद आदि विधाओं में हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। हिन्दी जगत इन्हें 'प्रपद्यवाद' आंदोलन प्रवर्तक के तौर पर याद करता है। 'प्रपद्यवाद' को ही 'नकेनवाद' से भी अभिहित किया जाता है। आलोचक के रूप में हिन्दी के कालजयी उपन्यास 'मैला आँचल' को हिन्दी जगत से परिचय करवाने का यश इनको ही प्राप्त है। खैर, नलिन जी का हिन्दी कहानी में प्रवेश प्रेमचन्द के अवसान के बाद होता है। प्रेमचन्द का निधन 1936 में हुआ। नलिन जी की पहली कहानी कलकत्ते से निकलने वाली मासिक पत्रिका 'विश्वमित्र' में 'नारी की त्रिविधा' नाम से 1937 में प्रकाशित हुई। ढाई दशक की इस कथा-यात्रा में उन्होंने तकरीबन 55 कहानियाँ लिखी हैं। इनमें से तीस कहानियाँ 'विष के दाँत तथा अन्य कहानियाँ' और 'सत्रह असंगृहीत पूर्व छोटी कहानियाँ' संग्रहों में संकलित हैं। लगभग असंकलित 15 कहानियाँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई थीं। कुछ अधूरी और अप्रकाशित कहानियाँ हैं। पाँच कहानी अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थीं। इस संकलन में हिन्दी में प्रकाशित, अप्रकाशित, अधूरी कहानियाँ रखी गई हैं।
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