सीधे सामग्री पर जाएँ

हर ₹100 की खरीदारी पर 2 अंक पाएँ, 1 अंक = ₹1और जानें

New Release

Natya mulyankan Mala : Natakkar Dharamveer Bharti

  • पेपरबैक, हार्डबैक
  • प्रकाशन वर्ष 2026
  • ISBN 9789348650917
₹140 MRP ₹175 20% छूट

इस किताब पर आपकी बचत ₹35

संस्करण चुनें

स्टॉक में है, विक्रेता: नई किताब प्रकाशन

  • 3 अंक पाएँअगले ऑर्डर पर ₹3 की छूट
  • UPI, कार्ड या कैश ऑन डिलीवरीसुरक्षित भुगतान, जैसे चाहें
  • सीधे प्रकाशक सेमूल संस्करण, MRP से कम दाम पर
  • इस किताब के बारे में सवाल?WhatsApp पर पूछें
सदस्यों को ऑनलाइन ख़रीद पर 5% अतिरिक्त छूट। सदस्यता मुफ़्त।और जानें
पुस्तकालय या स्कूल के लिए 10 या ज़्यादा प्रतियाँ चाहिए?दाम पूछें

किताब के बारे में

कवि, कथाकार के रूप में ख्यात धर्मवीर भारती एक सफल नाटककार के रूप में भी हमारे सामने आते हैं । ‘नदी प्यासी थी’ उनके चार एकांकी और एक ध्वनिरूपक का संग्रह है । उनको सर्वाधिक प्रसिद्धि % ‘अन्धा युग’ और ‘कनुप्रिया’ से प्राप्त हुई जिसे अपने समय के महत्त्वपूर्ण सभी रंग–निर्देशकों ने मंचित किया । ‘अन्धा युग’ धर्मवीर भारती जी द्वारा 1953–54 में लिखा एक गीति नाट्य है जिसका प्रसारण आकाशवाणी से हुआ । इसे सुनकर विख्यात रंग निदेशक सत्यदेव दुबे बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने इस नाटक को 1962 में खुले मंच में मंचित किया । नाटक की यह स्क्रिप्ट उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक इब्राहिम अल्काजी को भेजी । अल्काजी एनएसडी में जाने के पहले मुम्बई में थियेटर करते थे और एनएसडी डायरेक्टर बनकर दिल्ली जाने पर अपनी नाट्य संस्था की जिम्मेदारी सत्यदेव दुबे जी को सौंपी थी । अल्काजी को भी ‘अन्धा युग’ नाटक इतना पसन्द आया कि उन्होंने उसे पूरी भव्यता के साथ दिल्ली के पुराने किले में प्रस्तुत किया । इस नाट्य मंचन की भव्यता ने हिन्दी रंगमंच में नया अध्याय गढ़ दिया था । महाभारत युद्ध के अन्तिम दिन पर आधारित यह नाटक चार दशक से भारत की प्रत्येक भाषा में मंचित हो रहा है । इब्राहीम अल्काजी, रतन थियम, अरविन्द गौड़, रामगोपाल बजाज, मोहन महर्षि, एम– के– रैना और कई अन्य भारतीय रंगमंच निर्देशकों ने इसका मंचन किया है ।

पाठकों की समीक्षाएँ

किताब ख़रीदने वाले पाठकों की राय

–अभी कोई रेटिंग नहीं

यह किताब पढ़ी है? आपकी समीक्षा से दूसरे पाठकों को मदद मिलेगी।

समीक्षा लिखने के लिए लॉग इन करें
अभी कोई समीक्षा नहींNatya mulyankan Mala : Natakkar Dharamveer Bharti पर अपनी राय लिखने वाले पहले पाठक बनें।

आपको ये भी पसंद आ सकती हैं

New Release की और किताबें

पुस्तकालय, स्कूल या दुकान के लिए ख़रीद रहे हैं?

किताबों के नाम और प्रतियों की संख्या भेजें। हम WhatsApp पर दाम बता देंगे।

कोई और किताब ढूँढ रहे हैं?

हमारा पूरा सूची-पत्र डाउनलोड करें, या जो किताब साइट पर न मिले, उसके लिए हमें लिखें।

इस किताब की ख़रीद से जुड़े सवाल

यह किताब किन संस्करणों में मिलती है?

पेपरबैक: ₹140 (MRP ₹175)। हार्डबैक: ₹296.25 (MRP ₹395)।

क्या कैश ऑन डिलीवरी (COD) की सुविधा है?

हाँ। चेकआउट पर कैश ऑन डिलीवरी चुनें, या UPI, कार्ड या नेट बैंकिंग से ऑनलाइन भुगतान करें।

मुझे कितने अंक मिलेंगे?

हर ₹100 की ख़रीद पर 2 अंक मिलते हैं। इस किताब के पेपरबैक संस्करण पर 3 अंक मिलेंगे, यानी अगले ऑर्डर पर ₹3 की छूट।

क्या सदस्यों को अलग से छूट मिलती है?

हाँ। सदस्यों को हर ऑनलाइन ऑर्डर पर 5% अतिरिक्त छूट मिलती है, और सदस्यता बिल्कुल मुफ़्त है। सदस्यता देखें।

Natya mulyankan Mala : Natakkar Dharamveer Bhartiपेपरबैक
₹140₹175
कार्ट देखें
Natya mulyankan Mala : Natakkar Dharamveer Bharti - Ed. Ajay Tiwari - किताब का कवर इस किताब के बारे में पूछें