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Navjagran Yugeen Hindi Upanyaso Ka Stree-Path

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2025
978-81-993107-2-8

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नवजागरण वास्तव में यूरोप का एक ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने यूरोपीय संस्कृति में नये जीवन का संचार किया। इस आंदोलन ने पूरे विश्व को प्रभावित किया और आधुनिकता की बुनियाद रखी इस आंदोलन के द्वारा समाज में व्याप्त रूढ़ियों और कुप्रथाओं में सुधार लाने की बात की गयी। वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टि अपनाते हुए धर्म में सुधार लाना भी इस आंदोलन का उद्देश्य था, इसलिए धर्म के स्थान पर दर्शन को महत्त्व दिया गया। मानवतावादी विचारों को प्रोत्साहित करना इसका मुख्य एजेंडा था। इस प्रकार नवजागरण ने एक नवीन जीवन शैली और नयी संस्कृति से पूरे विश्व को परिचित करवाया। भारत में नवजागरण और आधुनिकता की बुनियाद औपनिवेशिक शासन द्वारा रखी गयी। यूरोप में नवजागरण ने साम्राज्यवाद और धार्मिक सत्ता के कठोर नियंत्रण से मुक्ति प्रदान की तो भारत में साम्राज्यवादी शासन में ही नवजागरण की लहर उत्पन्न हुई। इसलिए भारत का उन्नीसवीं शताब्दी का नवजागरण राष्ट्रीय भावना के साथ विकसित हुआ। भारत में उन्नीसवीं शताब्दी का युग दो संस्कृतियों की टकराहट का युग था। ईसाई मिशनरियाँ हिन्दू और मुसलमानों के धर्म पर लगातार आक्रमण कर रही थीं। अंग्रेज़ी शिक्षा, भारतीय सभ्यता और संस्कृति को आघात पहुँचा रही थी। इसी टकराहट और अपनी अस्मिता को बचाए रखने की कोशिश ने ही नवजागरण को जन्म दिया। सामाजिक और धार्मिक सुधार की प्रक्रिया आरम्भ हुई तो स्त्री-जीवन में भी सुधार लाने की कोशिश की गयी। स्त्री-शिक्षा को महत्त्व प्रदान किया गया। क्योंकि शिक्षा ही वह हथियार था जिसके माध्यम से स्त्री को सशक्त बनाया जा सकता था। उन्नीसवीं शताब्दी में स्त्री-सशक्तीकरण का मुद्दा पूरी दुनिया में छाया हुआ था। इग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी तथा रूस के समाज सुधारक तथा बुद्धिजीवी स्त्री को सशक्त बनाने की पुरज़ोर

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