सीधे सामग्री पर जाएँ

हर ₹100 की खरीदारी पर 2 अंक पाएँ, 1 अंक = ₹1और जानें

Alochana/आलोचना

Prasad Ke Natko Mein Ras Aur Dwand

  • हार्डबैक
  • प्रकाशन वर्ष 2019
  • ISBN 978-81-90478-04-5
₹262.50 MRP ₹350 25% छूट

इस किताब पर आपकी बचत ₹87

संस्करण चुनें

स्टॉक में है, विक्रेता: नयी किताब प्रकाशन

  • 5 अंक पाएँअगले ऑर्डर पर ₹5 की छूट
  • UPI, कार्ड या कैश ऑन डिलीवरीसुरक्षित भुगतान, जैसे चाहें
  • सीधे प्रकाशक सेमूल संस्करण, MRP से कम दाम पर
  • इस किताब के बारे में सवाल?WhatsApp पर पूछें
सदस्यों को ऑनलाइन ख़रीद पर 5% अतिरिक्त छूट। सदस्यता मुफ़्त।और जानें
पुस्तकालय या स्कूल के लिए 10 या ज़्यादा प्रतियाँ चाहिए?दाम पूछें

किताब के बारे में

जयशंकर प्रसाद एक सजग और युगचेता नाटककार थे । उन्होंने भरत के ‘नाट्यशास्त्र’ का गहन अध्ययन किया था, अत: भारतीय रसवाद के अनुरूप उन्होंने रस को नाटक की आत्मा घोषित किया । प्रसाद ने न केवल सैद्धान्तिक रूप से रस संबंधी अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया अपितु व्यावहारिक रूप से भी अपने समस्त नाटकों में रस का पूर्ण निर्वाह किया है । भारतेन्दु युग से ही हिन्दी–नाटकों पर पाश्चात्य–नाटकों का प्रभाव पड़ना आरंभ हो गया था । यह प्रभाव बांग्ला में द्विजेन्द्र लाल राय के नाटकों से होता हुआ हिन्दी में आया था । युगचेता होने के कारण प्रसाद भी इस प्रभाव से अछूते नहीं रह सके फलस्वरूप उन्होंने भी शेक्सपीयर, द्विजेन्द्र लाल राय प्रभृति नाटककारों के नाटकों का अध्ययन किया । यद्यपि प्रसाद ने द्वन्द्व विषयक सैद्धान्तिक चिंतन नहीं किया है तथापि व्यावहारिक रूप से द्वन्द्व भी उनके नाटकों का अनिवार्य तत्व बनकर आया है । प्रसाद ने अपने समस्त नाटकों में रस और द्वन्द्व का समन्वय प्रस्तुत किया है जिससे उनके नाटक अधिक सशक्त और यथार्थानुकूल बन पड़े है । ‘स्कन्दगुप्त’, ‘चन्द्रगुप्त’ एवं ‘ध्रुवस्वामिनी’-तीनों जयशंकर प्रसाद के सर्वश्रेष्ठ और महत्वपूर्ण नाटक माने जाते हैं । इन तीनों नाटकों में रस और द्वन्द्व का समन्वय अत्यन्त प्रभावशाली बन पड़ा है । प्रस्तुत पुस्तक में प्रसाद के नाटकों में रस और द्वन्द्व की दृष्टि से ‘स्कन्दगुप्त’, ‘चन्द्रगुप्त’ व ‘ध्रुवस्वामिनी’ का विशेष अध्ययन किया गया है ।

पाठकों की समीक्षाएँ

किताब ख़रीदने वाले पाठकों की राय

–अभी कोई रेटिंग नहीं

यह किताब पढ़ी है? आपकी समीक्षा से दूसरे पाठकों को मदद मिलेगी।

समीक्षा लिखने के लिए लॉग इन करें
अभी कोई समीक्षा नहींPrasad Ke Natko Mein Ras Aur Dwand पर अपनी राय लिखने वाले पहले पाठक बनें।

आपको ये भी पसंद आ सकती हैं

Alochana/आलोचना की और किताबें

पुस्तकालय, स्कूल या दुकान के लिए ख़रीद रहे हैं?

किताबों के नाम और प्रतियों की संख्या भेजें। हम WhatsApp पर दाम बता देंगे।

कोई और किताब ढूँढ रहे हैं?

हमारा पूरा सूची-पत्र डाउनलोड करें, या जो किताब साइट पर न मिले, उसके लिए हमें लिखें।

इस किताब की ख़रीद से जुड़े सवाल

यह किताब किन संस्करणों में मिलती है?

हार्डबैक: ₹262.50 (MRP ₹350)।

क्या कैश ऑन डिलीवरी (COD) की सुविधा है?

हाँ। चेकआउट पर कैश ऑन डिलीवरी चुनें, या UPI, कार्ड या नेट बैंकिंग से ऑनलाइन भुगतान करें।

मुझे कितने अंक मिलेंगे?

हर ₹100 की ख़रीद पर 2 अंक मिलते हैं। इस किताब के हार्डबैक संस्करण पर 5 अंक मिलेंगे, यानी अगले ऑर्डर पर ₹5 की छूट।

क्या सदस्यों को अलग से छूट मिलती है?

हाँ। सदस्यों को हर ऑनलाइन ऑर्डर पर 5% अतिरिक्त छूट मिलती है, और सदस्यता बिल्कुल मुफ़्त है। सदस्यता देखें।

Prasad Ke Natko Mein Ras Aur Dwandहार्डबैक
₹262.50₹350
कार्ट देखें
Prasad Ke Natko Mein Ras Aur Dwand - Asha - किताब का कवर इस किताब के बारे में पूछें