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Sanchayan : Swayam Prakash (3 Vol)
हिन्दी कहानी लेखन में नयी कहानी आंदोलन के बाद जिन कथाकारों ने अपनी सर्वव्यापी गंभीर पहचान बनाई है उनमें स्वयं प्रकाश का नाम अग्रणी है । स्वयं प्रकाश ने कहानी लेखन में अपनी निजी शैली बनाई और अपनी कहानियों को प्रेमचंद प्रवर्तित प्रगतिशील कथा धारा से जोड़ते हुए भी उनकी मौलिकता बनाए रखी । उन्होंने लगभग तीन सौ कहानियों का लेखन किया जिनकी विषय विविधता चैंकाने वाली है । वे भारतीय किसान, मजदूर, सामान्य गृहस्थ और बच्चों को अपनी कहानियों का विषय बनाते हैं तथा वैचारिक स्तर पर भी भारतीय समाज के विभिन्न स्तरों का मूल्यांकन करते हैं । बतकही करते हुए अत्यंत सामान्य जीवन परिस्थितियों में कहानी बुन लेना स्वयं प्रकाश का कौशल है और इस कौशल का प्रारम्भिक परिचय उन्होंने श्नीलकान्त का सफ़रश् में दिया था जो अभी भी प्रासंगिक और लोकप्रिय बनी हुई है । बाद में वे मध्य वर्गीय जीवन के कोनों–अंतरों तक अपनी कहानी को ले गए तथा साम्प्रदायिकता, जातिवाद और भूमंडलीकरण को भी कहानियों का विषय बनाया । उनकी लिखी गई कहानी श्पार्टीशनश् पर फिल्म बनी और अनेक विश्वविद्यालयों ने उसे अपने पाठ्यक्रम में जगह दी । इसी तरह देश प्रेम पर श्नेताजी का चश्माश् कहानी अनेक वर्षों से स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा रही है जो अपनी संवेदनशीलता में भी बारीक बात कह जाती है । संचयन के पहले खंड में स्वयं प्रकाश की सभी प्रतिनिधि और श्रेष्ठ कहानियों के साथ उनका अनौपचारिक गद्य भी डायरी की शक्ल में पढ़ा जा सकता है ।
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