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Saniya Ki Kahaniyan

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2026
9789348162151

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अनामिका की यह पंक्तियाँ स्त्री के अस्तित्व और स्त्री को समझने की नयी परिभाषा गढ़ती है। दरअसल पुरुषसत्ताक समाज में स्त्री की ओर देखने का पारंपरिक नज़रिया आज भी बना हुआ है। स्त्री स्वयं भी कई बार इस नज़रिये को बदल नहीं पाती है। वह उसी अनचाही रास्तों पर सफ़र करती रहती है। धर्म, संस्कृति, लोक परंपरा, जातिगत आस्था ने उसके जीवन लक्ष्य को पहले ही निर्धारित किया है। अतः उसका संघर्ष, उसके सपनें, उसकी आकांक्षाएँ हमेशा इतिहास के पन्नों में धूमिल रही है। पर इस धूल को साफ़ कर इतिहास में दफ़न स्त्री के सपनों, आकांक्षाओं को तेजोमय करने का काम कई रचनाकारों ने किया है। आज की स्त्री अपने अस्तित्व को सहजते हुए सपनों को पूरा करना जानती है। वह केवल अपने लिए नहीं, अपनों के लिए भी जीती है। आधुनिक भारतीय स्त्री के इस वैचारिक परिवर्तन में भारतीय भाषाओं में रचित साहित्य की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही है। भारतीय साहित्य विविध रंगों, विविध गंधों में रचा हुआ ऐसा साहित्य है, जिसकी नीव में 'भारतीयता' है। मराठी, हिंदी, कन्नड़, तमिल, मलयालम, बंगला आदि सभी भाषाओं में रचित साहित्य ने स्त्री के हक़ एवं अधिकार की वकालत की है। इसमें स्त्री रचनाकारों की भी भूमिका महत्त्वपूर्ण रही है। अनुवाद ने इस भाषायी सीमा को मिटाकर स्त्री साहित्य को भारतीय जनमानस तक पहुँचाया है।

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