• New product

Siye Rammay Sab Jag Jaani

(0.00) 0 Review(s) 
2026
978-93-47602-30-6

Select Book Type

Earn 5 reward points on purchase of this book.
In stock

भक्ति की ध्वजा के दिग्-दिगंत में संवाहक हैं गोस्वामी तुलसीदास । उनकी रामभक्ति एक ऐसा रसायन है, जिससे भौतिक जगत की समस्त व्याधियों का समूल नाश हो जाता है। उनकी रामभक्ति एक ऐसा दिव्य संगीत है, जो हमारे हृदय के तारों को झंकृत करके हमें एक अलौकिक आनंद-लोक में पहुँचाता है। उनकी रामभक्ति एक ऐसी विलक्षण वृत्ति है, जो हमारे जीवन में पावनता, सरसता, उल्लास और शक्ति का संचार करती है। तुलसीदास की सभी रचनाएँ श्रेष्ठता की कसौटी पर खरी उतरती हैं, पर 'रामचरितमानस' की बात ही कुछ और है। तुलसी के 'मानस' की रश्मि-राजि देश-काल की सीमाएँ तोड़कर संपूर्ण मानवता को विमुग्ध कर रही है। तुलसी के राम में जन-जन का राम बनने की जो दिव्य शक्ति है, वह भागवत में प्रतिष्ठापित उनके लोकरंजक स्वरूप के कारण है। तुलसी के राम और सूर के कृष्ण सगुण भक्ति के साक्षात् उदाहरण हैं। श्रीराम के शक्ति-शील-सौंदर्य समन्वित स्वरूप की झाँकी देखकर मानव-मन सहज ही भावविभोर हो उठता है। इस मनोहरता के समक्ष हर मन 'नयन बिनु बानी' हो उठता है। इस अनिर्वचनीय सुषमा को अंतस् सदा-सदा के लिए अपने भीतर सँजो कर रखना चाहता है। इस दिव्य संगीत को भक्त-कंठ अपनी वाणी से निःसृत करके श्रीराम जानकी के चरणों में समर्पित करना चाहता है। यह और कुछ नहीं, राम-नाम का ऐसा जादू है, जिसने पूरे संसार को सम्मोहन-पाश में बाँध रखा है, अपने आकर्षण में आबद्ध कर रखा है।

You might also like

Reviews

No Reviews found.