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Uma Shankar Chaudhary : Chuni Hui Kahaniyan

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2026
978-9348650696

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कहानी की बारीकियों को ठीक-ठीक भांपने वाले दिग्गज आलोचक नामवर सिंह ने न जाने क्यों कहा था कि कहानी एक नाजुक विधा है। असल में, कहानी एक बारीक विधा है बल्कि जटिल भी। कहानीकार हो जाना इतर योग्यता है, कहानी साध लेना बिल्कुल जुदा कौशल। उमा शंकर चौधरी के पास कहानी साधने और उसे कहने का अद्भुत कौशल है। उस कौशल का खूबसूरत नमूना उनकी अनेक कहानियों में मौजूद है। इस संग्रह में उमा शंकर चौधरी की कुल पांच चुनिंदा कहानियां संकलित हैं। हालांकि उनकी लगभग दो दर्जन प्रकाशित कहानियों में इन कहानियों को चुन पाना सरल नहीं था। संकलन तैयार करने के दौरान उनकी प्रायः सभी कहानियों पर बारी-बारी से सोचा-विचारा। कभी कोई कहानी चुनी गई, कभी दूसरी कहानी पर मन बना। अंततः जिन कहानियों को 'चुनी हुई कहानियां' के लिए संकलित किया है, उससे कहानीकार का व्यक्तित्व समग्रता से उभरकर आता है, ऐसा मेरा मानना है। संकलन में पहली कहानी का शीर्षक है 'ललमुनिया मक्खी की छोटी सी कहानी'। जिस प्रवृत्ति को भूमंडलीकरण के नाम से जानते हैं, उसका भयानक असर आम जनजीवन पर पड़ा है। आदमी की हंसी के पीछे कितनी गहन उदासी और तकलीफ छिपी हुई है। इस कहानी को कहानीकार ने असरदार तरीके से बुना है। ललमुनियां की मां पहले सुख-सुविधा के लालच में खुद का जीवन नर्क में तब्दील कर लेती है। फिर लाख समझाने-बुझाने के बाद वह मां की बात नहीं मानती और कृत्रिम चमक-दमक हासिल करने के फिराक में जान गंवाती है। कहानी में मनुष्य भी है लेकिन वह बेबस है। उसकी बेबसी की वजह बाजार की करमात है। एक समय था जब अनगिनत लोग अपनी कारीगरी के बूते अपने परिवार का पेट पालते थे। लेकिन वे कारीगर अचानक गायब हो गए। उसकी रोजी-रोटी

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