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Vishambharnath Sharma 'Kaushik' Chuni Hui Kahaniyan
आधुनिक काल के विवेच्य युग के प्रथमथः कथाकारों में पं. विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक' समर्थ कहानीकार के साथ-साथ उपन्यासकार, नाटककार, सम्पादक, अनुवादक, पत्रकार फोटो चित्रक डायरी-चिट्ठी लेखक एवं विचारक रहे हैं। जो अपने समसामयिक तत्कालीन समाज के सांस्कृतिक यथार्थ का वृहत्तर चित्र व छवि को प्रस्तुत किया है। जिसमें उन्होंने कथा-साहित्य में राजाराममोहन राय के स्त्री विषयक पक्ष को वैज्ञानिक मनोभूमि पर गहरा प्रहार करते हुए समाधान की युक्ति जोड़ी है। जो आधुनिक समाज के निर्माण में महती भूमिका को अग्रसारित ही नहीं आन्दोलित भी किया है। साथ ही आपका लेखन में वैश्विक समाज का भी पुट से आधुनिकता का बीजारोपण का स्रोत खुलने से स्पष्ट है कि वे राष्ट्रीयता के साथ ही मानवतावाद के प्रति समर्पित लेखक रहे और अपने प्रगतिशील व वैज्ञानिक तर्को से भारतीय समाज का उन्नयन भी कर रहे थे। विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक' के लेखन साहित्य में आवश्यक पड़ताल से स्पष्ट है कि वे समाज के विविध पक्षों को अपने लेखन दायरा को वृहत् स्वरूप प्रदान किया है। तथा उसे अपने लेखन व चिन्तन की अपरिमित श्रोत से गहरा जुड़े रहे। वे गुण व दोष के अपने सामाजिक पहलुओं पर प्रभावित करते हुए नई-नई सूचनाओं का कुम्भ तो खड़ा किया ही उसके साथ सामाजिक अलबम प्रस्तुत से नवीन सलीह पर ला खड़ा किया है।
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