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Vishwas Dhalne Nahin Doonga
लिखना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। वरिष्ठ कथाकार ज्ञानरंजन का कहना है- 'सर्वोत्तम लेखन कैसे करें, अपनी रचनात्मक चुनौतियों को किस प्रकार ग्रहण करें यह तय करना बहुत मुश्किल काम है। हमारे समय की भाषा आज बिल्कुल बदल गई है। मैं अपनी भाषा में आज की कहानी नहीं लिख सकता। पक्का समझ लीजिए। यह ऐसा समय है जो बहुत तीव्र गति से बदल रहा है।' ज्ञानरंजन की यह बात हमें गंभीरता से सोचने पर मजबूर करती है। आज के इस मुश्किल समय में जब कहानी लिखना इतना कठिन है, एक अच्छी कविता लिखना तो और भी मुश्किल काम है। इसके बावजूद सभी भाषाओं में कविताएं लिखी जा रही हैं, यह बड़ी बात है। कविता में भाषा, काव्य शिल्प और रस का बहुत महत्त्व है। अच्छी भाषा, काव्य शिल्प और रस ही हैं जो कविता को पठनीय बनाती हैं। कविता में मौलिकता का होना भी अनिवार्य है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने साहित्य के इतिहास में रीतिकालीन कविता की भाषा और भंगिमा की बड़ी तारीफ की है। मगर उन्होंने यह भी कहा है कि रीतिकालीन कवियों में मौलिकता का अभाव है। रीतिकाल के कवि शास्त्र को मानते थे और भाव को शाश्वत मानते थे। वे मानते थे कि रस और अलंकार के बिना कविता नहीं होती, जबकि बिना इनके भी कितनी ताकतवर कविताएं लिखी गई हैं। और आज भी लिखी जा रही हैं।
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