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Vishwas Jeet Gaya

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2026
978-9348650191

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नव्या स्कूल से लौटी, तो बहुत उदास थी। गों ने एक निगाह में ही उसकी उदासी ताड़ ली। आजकल स्कूल में वार्षिक परीक्षा चल रही है, इसलिए वह फौरन समझ गई कि आज का पर्चा बिगड़ जाने से ही बिटिया रानी का चेहरा कुम्हलाया हुआ है। पर फिर भी अनजान बनते हुए पाडा उन्होंने, "क्या बात है बेटी, तबियत तो ठीक है न?" "हाँ, माँ।" नव्या उदास आवाज में बोली। माँ ने उसके माथे पर हाथ घरा, फिर मुस्कराई, "न बुखार तो नहीं है।... क्या गरिमा के साथ लड़ाई हो गई है?" नव्या और गरिमा पक्की सहेलियों हैं, माँ को मालूम था। इसलिए उन्होंने यह लड़ाई वाली बात उठाई। पर नव्या ने सिर हिला दिया, "न, उससे क्यों लहूँगी। वह तो मेरी सबसे प्यारी सहेली है।" "तब तो जरूर हमारी बिटिया रानी का आज का पर्चा बिगड़ गया है। सच-सच बताओ, यही बात है न?" माँ ने गहरी नजर से देखते हुए पूछा। नव्या ने दृष्टि झुका ली। उसकी बड़ी-बड़ी आँखों में छलक उठे आँसू माँ से छिपे न रहे। प्यार से उसका मुँह चूमते हुए बोलीं, "छिः इतनी छोटी-सी बात पर इतनी बड़ी उदासी? आज का पर्चा बिगड़ गया है, तो बिगड़ जाने दो। कल दूसरा पर्चा होगा। उसे खूब अच्छा करके आना।" "माँ,” नव्या कातर हो उठी, "पर्चा विगड़ा नहीं, मैंने बिगाड़ दिया है। अपनी लापरवाही की वजह से। पाँच नंबर का एक सवाल जानते-बूझते गलत

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