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Bhartiya Lok Mein Krishan
श्रीकृष्ण चरित ने समग्र भारतीय लोक को प्रभावित किया है। उनकी बाल लीलाएँ, राधा और गोपियों के साथ की गयी अनेक लीलाओं तथा रासलीलाओं ने उन्हें राधावल्लभ और गोपीवल्लभके साथ-साथ दिव्य प्रेम का नायक बना दिया। वे भारतीय लोक के लोकगीतों, लोककथाओं, लोकगाथाओं और लोकनृत्यों में समाहित हो गये। बालपन की लीलाओं में उनके ईश्वरीय स्वरूप और भक्तों के आराध्य के रूप का दर्शन होता है तो राधा और उसकी सखियों के साथ किये गये विहार ने उन्हें लोकविहारी बना दिया। महाभारत में श्रीकृष्ण की दिव्य छवि ने तो उन्हें महान से महानतम बना दिया। इस संबंध में बंकिमचंद्र चटर्जी का कथन उल्लेखनीय है-"कृष्ण सर्वत्र, सर्वकालीन, सर्वगुणमयी-अभिव्यक्ति में उज्ज्वलतम हैं। वे अपराजेय, अपराजित, विशुद्ध, पुण्यतम, प्रीतिमय, दयामय, अनुष्ठेय कर्म से अपराङ्मुख, धर्मात्मा बेदज्ञ, नीतिज्ञ, धर्मज्ञ, लोकहितैषी, न्यायनिष्ठ, क्षमाशील, निरपेक्ष, ज्ञाता, निर्मम, निरहंकार, योगी और तपस्वी है। इस कृति में भारत के लोकमानस में बचे-बसे श्रीकृष्ण के उक्त व्यक्तित्व को साक्षात्कार कराया गया है।
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