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Himanshu Joshi : Chuni Hui Kahaniya
हिमांशु जोशी की कहानियां उनके परिवेश, उनके अनुभवों और उन पात्रों की कहानियां हैं जो यथार्थ की ठोस भूमि से निकले हैं। वे अपनी कहानियों में सामाजिक परिवेश के संदर्भ में घट रही घटनाओं और उन घटनाओं के अनुरूप पात्रों का चयन करते हैं और घटना के विभिन्न पक्षों को सामने लाते हुए पात्रों की मनःस्थितियों का चित्रण करते हैं। उनकी कहानियां जितनी सहज, सरल और स्वाभाविक हैं, उतनी ही मार्मिकता, संवेदनशीलता और वैचारिकता लिए हुए हैं। उनकी कहानियों की मानवीय संवेदनाएं कहानी को एक नई ऊँचाई तक ले जाती हैं। उनकी कहानियां हमें उपेक्षितों और वंचितों के दुःख दर्द, उनके अभावों और उनकी पीड़ाओं से परिचित कराती हैं। हिमांशु जोशी अपनी इन कहानियों में अभावग्रस्त लोगों की पीड़ाओं को सहानुभूति देकर देश के नेताओं की क्रूरता और उनके द्वारा अवाम को दिये गये भरोसे के खोखलेपन को संवेदनशीलता के साथ उजागर करते हैं। वे शोषित वर्ग की जीवन स्थितियों में लगातार बढ़ने वाले अभावों और उनके कारण पैदा होनेवाले संदर्भों को सामने लाते हैं। ये कहानियां हमें बेहद तल्ख तरीके से यह एहसास कराती हैं कि आज़ादी के बाद भी आम आदमी के जीवन में कोई बुनियादी बदलाव नहीं हुआ और जनता का बहुत बड़ा हिस्सा अभावों, विवशताओं और अमानवीय रूढ़ियों के जाल में फंसा हुआ है। अपनी कहानियों के बारे में हिमांशु जोशी लिखते हैं, "मेरी कहानियों में असह्य-अमानवीय वेदना कहीं-कहीं व्यक्त हुई है। मैंने अपने शैशव में, अपने चारो ओर ऐसे अनेक पात्रों को जूझते देखा है।"
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