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Krantikari Damodar Swaroop Seth Aur 'Samyavaad Ka Bigul'
दामोदर स्वरूप सेठ आगे चलकर कांग्रेस समाजवादी दल और फिर समाजवादी दल में शामिल हो गए जहां उनकी महत्त्वपूर्ण जगह थी। जब देश की संविधान-निर्मात्री परिषद का गठन हुआ तो उसमें भी उनका चुनाव किया गया जिसकी सभाओं में उन्होंने संविधान के मसविदे पर अत्यंत तर्कपूर्ण और गम्भीर पक्ष रख कर सभी को विस्मित कर दिया। यह उनका बहुत चुनौतीपूर्ण और साहसिक कार्य था। उन्होंने सिरे से संविधान को समाजवाद विरोधी तथा पूंजीवाद का पक्षधर बताते हुए अपना विरोध व्यक्त कर उसके समर्थन में उस पर हस्ताक्षर करने से स्पष्ट मना कर दिया। उन्हें इस संविधान को लागू किए जाने से देश में किसी सामाजिक बदलाव की कोई उम्मीद नहीं थी। सामाजिक व्यवस्था के आमूलचूल परिवर्तन के लिए वे कानून की इस पोथी में गरीबों, वंचितों, शोषितों और कामगारों के अधिकारों का स्पष्ट खुलासा चाहते थे। संविधान के मसविदे पर उनकी पूरी बहस को इसी नज़रिए से देखा जाना चाहिए। क्या आज भारतीय संविधान पर उठ रहे निरन्तर सवालों के बीच संविधान-निर्मात्री सभा के आकार-प्रकार और संविधान के मसविदे पर उन दिनों सम्पन्न हुई विभिन्न पक्षों की दलीलों पर विचार करने के साथ ही दामोदर स्वरूप के मन्तव्य और उनके दृष्टिकोण को जानने और सामने लाने की बड़ी ज़रूरत नहीं है? ---सुधीर विद्यार्थी
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