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Natak Tota Maina

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2025
978-93-48409-45-4

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दर्शकों के बीच में बैठकर अपना नाटक खेले जाते हुए देखना बड़े संकट और जोखिम का काम है, विशेषकर जब दर्शक नाटककार को पहचानते हों। नहीं तो अपने नाटक के देखने का उत्तम उपाय यह है कि दर्शकों से बिल्कुल पीछे बैठकर चुपचाप अपना नाटक देखकर भाग जाया जाय। किन्तु पिछले वर्ष लखनऊ में आयोजित वृहत् मंच पर जब मेरा यह नाटक 'तोता-मैना : एक दास्तान' (तव यही नाम दिया था इसका) खेला जाने लगा, तब मुझसे वैसा न हो सका। लेकिन उस सम्बन्ध में और कुछ बताने के पहले यह नाटक क्या था इसे बता दूँ। तोता-मैना अपने यहाँ की प्रसिद्ध लोकगाथा है न। उसी का आधार लेकर उसी के भीतर से मैंने यह नाटक लिखा है। तोता-मैना का पुरुष-स्त्री के स्तर से सनातन का चला आता झगड़ा और प्रतिस्पर्धा प्रसिद्ध ही है। तोता का पक्ष है कि पुरुष अच्छा स्त्री खराब है। इसके विपरीत मैना का पक्ष है कि स्त्री अच्छी, पुरुष खराब।

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